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Dec 14, 2012

WALMART WILL NEVER COME TO INDIA..

ये हुई ना बात..

क्या वॉलमार्ट इस देश में आएगा ही नहीं ? किसने खाई वालमॉर्ट से रिश्वत ? ऐसे ही कुछ सवालों के साथ पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी के जाने-माने नेता यशवंत सिन्हा से रु-ब-रु हुए न्यूज एक्सप्रेस के प्रबंध संपादक निशांत चतुर्वेदी.


निशांत चतुर्वेदी -यशवंत सिन्हाजी स्वागत है आपका...

यशवंत सिन्हा- शुक्रिया.

एक रिटायर्ड जज जो करेंगे पूरी इन्क्वायरी एफडीआई के ऊपर...खासतौर पर वॉलमार्ट ने जो लॉबीइंग की है क्या इससे आप संतुष्ट हैं...क्या आपको लगता है कि ये पर्याप्त है?

यशवंत सिन्हा- ये मांग हम ही लोगों ने की थी...आपको याद होगा कि जब मैंने इस मुद्दे को उठाया था लोकसभा में तो मैंने ये कहा था कि सरकार को एक न्यायिक जांच की घोषणा करनी चाहिए जो टाइमबाउंड भी हो...60 दिनों के भीतर वो जांच रिपोर्ट आ जाए...क्योंकि जांच के लिए अगर जेपीसी बने, जांच के लिए न्यायिक जांच बैठे तो क्या होता है कि लंबा खिंच जाता है, तो इसलिए टाइम बाउंड कहा था और सरकार ने पूरी बात नहीं खोली है, उन्होंने यही कहा है कि एक रिटार्यड जज से जांच कराएंगे...ये नहीं कहा कि जज किस लेवल का होगा...सुप्रीम कोर्ट का रिटायर्ड जज होगा, हाईकोर्ट का रिटायर्ड जज होगा, लेकिन ये परंपरा है कि सरकार चीफ जस्टिस से पूछती है और चीफ जस्टिस एक नाम सुझाते हैं और उस व्यक्ति को इसमें अप्वाइंट किया जाता है...और मुझे लगता है कि जो तथ्य अभी तक सामने आए हैं...अगर ठीक से जांच हो तो जल्द ही सच्चाई सामने आएगी

यूएस एंबेसडर जो हैं, एनसी पावेल उन्होंने आज एक स्टेटमेंट दिया कि अमेरिका में लॉबीइंग और ब्रॉबरी दोनों में जमीन आसमान का फर्क है, उनका ये कहना है कि ये लॉबीइंग थी ब्रॉबरी नहीं, आप इससे कितना इत्तेफाक रखते हैं?

यशवंत सिन्हा- नहीं-नहीं...इत्तेफाक इससे नहीं रखता हूं...क्योंकि उनको साथ-साथ उनको ये भी बात कहनी चाहिए थी कि उनके देश में लॉबीइंग कानूनी है, हमारे देश में लॉबीइंग गैरकानूनी है, इसलिए कोई लॉबीइंग करता है अगर तो वह भी दोषी है, और लॉबीइंग में और ब्रॉबरी में बहुत ही थिन डिवाइंडिंग है और अमेरिका में उसी को पारदर्शी बनाने के लिए एक सिस्टम है कि हर तीन महीने में रिपोर्ट दो कि आपने क्या किया...यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, और इसलिए भारत में लॉबीइंग का अक्सर यही मतलब होता है कि इसमें पैसे खिलाए गए, इसमें भ्रष्टाचार हुआ, और इसलिए हमने मांग भी की कि भारत में एफडीआई रिटेल में आए इसलिए वो वहां अमेरिका में रिपोर्ट करें कि हमने लॉबीइंग की और लॉबीइंग में पैसे खर्चे तो जांच का विषय है...यहां पर जो वॉलमार्ट नाम की कंपनी है वो खुद अपने पदाधिकारियों के खिलाफ जांच कर रही है, उनको निलंबित उन्होंने कर दिया है...अमेरिका से ये भी खबर आ रही है कि भारत सरकार के कुछ पदाधिकारी हैं जिनके खिलाफ वहां जांच चल रही है कि क्या उनको पैसे खिलाए गए...तो इसलिए हमारे देश में इस पर जांच हो ये उभर कर सामने आया

जो संसद में हंगामा हुआ...सरकार की तरफ से...क्या ये उसी का नतीजा था?

यशवंत सिन्हा- नहीं पता नहीं, उस पर कहना मुश्किल है, लेकिन मैं एक और बात कहना चाहती हूं कि सरकार ने जब-जब बात मान ली है विपक्ष की तो सदन चला है और हम सब चाहते हैं कि पार्लियामेंट चले, लेकिन आपको पता है कि एक बार पूरा एक सेशन इसी में नष्ट हो गया कि जेपीसी बने या न बने...और उसके बाद जब बजट सत्र आया तो उन्होंने घोषणा कर दी कि जेपीसी बनेगी...अगर उसी सत्र में...शीतकालीन सत्र में घोषणा कर दी होती तो संसद चलती होती...इस बार हमने कहा कि एफडीआई पर चर्चा उस नियम के तहत हो जिसमें अंत में वोटिंग होगी उन्होंने पांच दिन तक उसको नहीं माना...पांच दिन तक संसद ठप रही, उसके बाद उसको मान लिया...संसद चल पड़ी तो...जिस दिन हमने जांच की मांग की...उसी दिन सरकार ने कह दिया होता कि हम न्यायिक जांच बैठाएंगे संसद आराम से चलती...संसद चलाने का जो सरकारी तरीका है, उसमें कहीं ना कही खोट दिखता है

क्या खोट दिखता है आपको? .क्या वजह है इसकी? या फिर ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते? .विपक्ष की जो गरिमा है क्या दरकिरनार कर दिया है उसको?

यशवंत सिन्हा- वजह ये है कि समय पर वो नहीं करते...ये भी हो सकता है ये सवाल उठा रहे हैं इसलिए हम नहीं मानेंगे...फिर बाध्य हो जाते हैं मानने के लिए क्या संसद में सरकार की तरफ से आपको एक एरोगेंस, एक एटीट्यूड ऑप सुप्रीमेसी दिखाई देती है?

यशवंत सिन्हा- हमें लगता है कि कही ना कहीं उनको बहुत ज्यादा भरोसा है अपने ऊपर और जब किसी को बहुत ज्या भरोसा हो जाता है अपने ऊपर तो अहंकार पैदा हो जाता है...मैं सरकार के कई मंत्रियों में इस बात को देखता हूं कि उनमें अहंकार पैदा हो गया है...संसद का सत्र चल रहा है...सरकार की दो बड़ी घोषणाएं होती हैं...एक कैश ट्रांसफर की...लेकिन कांग्रेस के मुख्यालय में संसद में नहीं फिर उसके बाद पेट्रोलियम मिनिस्टर घोषणा करते हैं कि गैस सिलेंडरों की संख्या 6 से बढ़ा कर 9 कर देंगे...संसद के बाहर...चुनाव आयोग ने आपत्ति जाहिर की...कहीं ना कहीं संसद की जो गरिमा है ...परंपराएं नष्ट हो रही हैं

आपने जो दोनों एक्जांपल बताए उससे आपको ऐसा लगता है कि...आप जानते हैं चुनावी माहौल है, गुजरात में चुनाव चल रहा है, हिमाचल में चुनाव हो चुके हैं, क्या आपको लगता है कि वोटर्स का जो माइंडसेट है...उसको इन्फ्लूएंस करने की कोशिश है?

यशवंत सिन्हा- बिल्कुल, इसीलिए तो चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया है इसमें...और उसको कैश ट्रांसफर स्कीम को भी रोका और इस पर भी आपत्ति जताई है जो मोइली जी का स्टेटमेंट है... मेरी दो बाते हैं, एक तो ये कि संसद सत्र जब चलता है महत्वपूर्ण घोषणाएं संसद के अंदर होनी चाहिए और दूसरी ये कि जब चुनाव का माहौल हो तो सरकार को ऐसी घोषणाओं से बचना चाहिए...सरकार दोनों मोर्चों पर दोषी साबित हुई है

एफडीआई पर अगर मैं वापस लौटूं..वॉलमार्ट ने एक एग्रीमेंट करना शुरू किया है कि फॉरेन करप्शन प्रैक्टिसेस एक्सट एफसीपीए 1977 का...वो एक्ट जो एक पूरा यूएस है... वो हमारे लैंड लॉर्ड्स के साथ एक एग्रीमेंट होगा कि आप किसी भी ब्राइबरी या उसमें नहीं फंसेंगे...एक तरफ लॉबीइंग का डिफरेंस वो हमें समझा रहे हैं, दूसरी तरफ ये एग्रीमेंट कर रहे हैं, क्या हमें इस बात का डर नहीं होना चाहिए कि अमेरिकन लॉ वो हमारे देश में लगा रहे हैं?

यशवंत सिन्हा- मैं आज के दिन पूरी जिम्मेदारी से कहना चाहता हूं कि वॉलमार्ट इस देश में आएगा ही नहीं...ये जो भावना संसद में व्यक्त हुई है... जो देश की भावना है उसमें हम विदेशी किराना स्टोर्स को स्वीकार नहीं करेंगे

एक आम आदमी है...हर तीसरे-चौथे दिन मैं भी सब्जी खरीदने जाता हैं, कुछ किराना भी खरीदता है...अब तो वो भी बोलता है कि अब तो वोट भी हमारे खिलाफ हो गया अब तो वो आ के रहेंगे?

यशवंत सिन्हा- नहीं, नहीं आएगा...क्योंकि कभी-कभी संसद में जो वोट होता है मैनेज्ड वोट होता है ...वो देश की भावना को रिफलेक्ट नहीं करता...बीएसपी ने वॉकआउट किया, राज्य सभा में वोट दिया...जनता को उन्हें बताना पड़ेगा...सारा देश जानता है कि राज्यसभा में उन्होंने सरकार के लिए वोट नहीं किया होता तो सरकार हार जाती, लोकसभा में वोट की जरूरत नहीं थी...जेएमएम के दो सदस्य हैं लोकसभा में, एक आए नहीं दूसरे ने सरकार को वोट दिया, राज्यसभा में एक सदस्य हैं वो वॉकआउट कर गए...बहुत से दल ऐसे हैं जो गंभीर मुद्दों पर चिंतन नहीं करते

क्या आप ये कहना चाहते हैं कि संसद में जो हुआ वो हो गया...अब सड़क पर कुछ और होगा?

यशवंत सिन्हा- हमने उसी दिन कह दिया था कि अब लड़ाई सड़क पर जाएगी

कपिल सिब्बल जी का कहना है कि बहस भले ही उन्होंने कर लिया हो वोट हमारे फेवर में हैं, ऐसे में कौन सी चीज उन्हें रोकेगी?

यशवंत सिन्हा- जनभावना, जनता का फैसला प्रजातंतर में सबसे बड़ा होता...इ्न्होंने आधा-अधूरा जो स्कीम लाया है कि राज्यों के ऊपर छोड़ दिया...आज राजस्थान कह रहा है कि हम एफडीआी लाएंगे... 2013 के अंत में वहां चुनाव होने हैं, उससे पहले वहां सरकार बदल गई, दिल्ली में सरकार बदल गई तो क्या होगा फिर...जो राज्य इसके खिलाफ हैं वो कल मना कर दें कि हम इन कंपनियों को प्रीक्योरमेंट भी नहीं करेंगे तो वो माल कहां से लाएंगे...बहुच से सवाल हैं जिनके जवाब नहीं हैं...जब तक विस्तार से नहीं सोचेंगे तब तक मुझे लगता है कि लागू ही नहीं होंगे...फिर भी लागू होगा तो सड़क पर देखेंगे

आप स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस के चेयरमैन हैं...बैंकिंग अमेंडमेंट बिल आता है...लेकिन उसमें ऐसा लगता है कि बाइपास किया गया है जेपीसी को...क्या आप सहमत हैं इस बात से?

यशवंत सिन्हा- बिल्कुल सहमत हूं....ये बैंकिंग अमेंडमेंट बिल मैं जब वित्तमंत्री था तब शुरू किया गया था...ये हमनें पेश किया...वहां से स्टैंडिंग कमेटी के पास चला गया, वहां से लौटा ही नहीं, लोकसभा भंग हो गई तो लैप्स कर गया...फिर से 2005 में यूपीए वन सरकार इसे फिर लाई...स्टैंडिंग कमेटी ने इसकी सिफारिश की तो उनकी हिम्मत नहीं हुई कि बैंकिंग बिल को दोबारा संसद में लाएं क्योंकि वो लेफ्ट के सपोर्ट पर थे, ये फिर लैप्स कर गया उसके बाद तीसरी बार ये बिल फिर लोकसभा में आया फिर स्टैंगिंग कमेटी में आया...फिर हम लोगों ने सिफारिश करके भेज दिया और उसके बाद सरकार इसमें तीन नए मुद्दे जोड़ देती है, इसमें एक है कि बैंकों का पैसा वायदा कारोबार में लगेगा...सरकार की सोच दिन-प्रतिदिन बदलरही है तो कैसे चलेगा...इसीलिए हमने इसका विरोध किया कि ये हमें स्वीकार्य नहीं कि आप इस तरह की पद्धति पर चलें...संसदीय कमेटी की जो परंपरा है उसका अनादर हुआ है

अब सुषमा जी की बात हुई, जेटली जी की बात हुई ...अब आपका क्या स्टैंड है?

यशवंत सिन्हा- हमारा स्टैंड है कि सरकार फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट वाला अमेंडमेंट है उसको वापस ले ले तो हम सरकार के बिल का समर्थन करेंगे...वरना विरोध होता रहेगा

यूपीए जो है कही ना कहीं ऐसा दिखाई देता है कि 2014 की तैयारी में जुट गया है, लेकिन एनडीए की तरफ से ये दिखाई नहीं देता?

यशवंत सिन्हा- वो आपको ऐसा इसलिए दिख रहा है क्योंकि यूपीए सरकार में है...सरकार में बहुत कुछ कामकाज ऐसा हो रहा है जो साफ तौर पर लगता है कि चुनाव को प्रभावित करने के नजरिए से किया जा रहा है...हम विपक्ष में हैं और विपक्ष के नाते जो करना चाहिए हम कर रहे हैं...हम हर समय चुनाव के लिए तैयार हैं

झारखंड में सरकार पर संकट है?

यशवंत सिन्हा- कुछ बयान ऐसे आए हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं, जेएमएम की तरफ से बयान आया कि हिम्मत हो तो वापस ले लो, हम किससे समर्थन वापस लें...मुंडा हमारे मुख्यमंत्री हैं...वापस तो जेएमएम को लेना होगा ना...ये बहुत साधारण सी बात है जो वो नहीं समझ रहे हैं, झारखंड में हम साथ जरूर आए लेकिन हमारे मन नहीं मिले...सरकार में शामिल जो दल हैं चाहें तो समर्थन वापस ले लें

रैपिड फायर राउंड

सवाल-एफडीआई लॉबीइंग या ब्रॉबरी

जवाब-ब्रॉबरी

सवाल-सरकार रिफ़ॉर्म ला रही है या धूल झोंक रही है

जवाब-धूल झोंक रही है

सवाल-बैंकिगं बिल. स्पेकुलेशन या रिफॉर्म

जवाब-स्पेकुलेशन

सवाल-यूपीए-2 -करप्शन या एक्सप्लॉयटेशन

जवाब-करप्शन या एक्सप्लॉयटेशन

सवाल-प्रमोशन में आरक्षण-पिछड़ों का मुद्दा या वोट बैंक की राजनीति

प्योर वोट बैंक की राजनीति

धन्यवाद

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